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महारानी इंदिरा देवी जिसने ग्वालियर के सिंधिया से रिश्ता तोड़कर की लव मैरिज, सैंडल में जड़वाती थी हीरे-मोती

Newsfast Sabsefast24

धनबाद : आज हम जिस महारानी की बात कर रह है, वो अपने जमाने की बोल्ड राजकुमारी थीं. और ये बात उन्होंने एक बार नहीं कई बार साबित की. जब वह राजकुमारी थीं, तो उनके दीवाने राजकुमारों की कोई कमी नहीं थी.
उनका रिश्ता भारत की सबसे ताकतवर रियासतों में एक ग्वालियर के महाराजा माधो राव सिंधिया से तय हो गया. तब वह 18 की थीं और महाराजा 38 के. लेकिन उन्हें किसी और से प्रेम हो गया. तब उन्होंने बोल्ड फैसला लेते हुए रिश्ता तोड़ दिया. जिससे प्रेम हुआ उसी से लंदन जाकर शादी की. ये महारानी इतनी फैशनेबल और अमीरी का दिखावा करने वाली थीं कि अपनी सैंडल्स में बेशकीमती हीरे और रत्न जड़वाए थे. वह अपने जमाने की फैशन दिवानी भी थीं.
बात महारानी इंदिरा देवी की हो रही है. वह 1892 में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय और महारानी चिमनाबाई के घर जन्मी. लंदन में पढ़ने गईं. इंदिरा बेहद खूबसूरत थीं. युवावस्था में ही कई भारतीय राजकुमारों ने उनसे प्रेम किया. उनकी सगाई 18 साल की उम्र में ही माधो राव सिंधिया से तय हो गई. जो तब 38 वर्ष के थे. ग्वालियर भारत की सबसे शक्तिशाली रियासतों में एक थी. लेकिन होना तो कुछ और था. कुछ ऐसा कि देश के सारे रजवाड़ों में तहलका सा मच जाए।

सगाई किसी से लेकिन प्यार किसी से
दिसंबर 1911 में दिल्ली दरबार में इंदिरा देवी जब अपने छोटे भाई के साथ आईं तो उनकी मुलाक़ात कूचबिहार के राजकुमार जितेंद्र नारायण से हुई. इंदिरा की सगाई को एक साल हो चुके थे. लेकिन इस मुलाकात के बाद राजकुमारी और जितेंद्र नारायण में प्रेम हो गया. हालांकि जितेंद्र की इमेज तब प्लेबॉय प्रिंस की थी.
इंदिरा देवी अप्रतिम सुंदरी थीं. उन्हें तब देश की सबसे सुंदर महिलाओं में माना जाता था. वह जयपुर की महारानी गायत्री देवी की मां थीं. फैशन की देवी भी कहा जाता था. सही मायनों में शिफान की साड़ी को पापुलर करने वाली यही महारानी थीं. उन्होंने इटली की एक जानी मानी जूता निर्माता कंपनी को 100 जोड़ी सैंडल बनाने का आर्डर दिया, जिसमें कुछ में हीरे और बेशकीमती रत्न लगाए गए.
ग्वालियर के महाराजा को पत्र लिख सगाई तोड़ी
जितेंद्र कूच बिहार के राजा नृपेंद्र नारायण के बेटे थे. कूच बिहार अब पश्चिम बंगाल का एक जिला है. इंदिरा देवी जानती थीं कि सगाई टूटने से काफी बदनामी होगी. मां-बाप अलग नाराज होंगे लेकिन उन्होंने ग्वालियर के महाराजा को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर सगाई तोड़ दी. बड़ौदा राजघराना तो इससे हिल गया. दूसरे राजघरानों में भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया हुई.
पेरेंट्स की मर्जी के खिलाफ लंदन में शादी की
इंदिरा के अभिभावकों ने ग्वालियर के राजघराने से सगाई का टूट जाना तो किसी तरह स्वीकार किया लेकिन उन्हें कतई मंजूर नहीं था कि उनकी बेटी जितेंद्र से शादी करे. उन्होंने जितेंद्र को चेतावनी दी कि वो उनकी बेटी से दूर रहें. लेकिन ये सब कुछ काम नहीं कर सका.क्योंकि जितेंद्र और इंदिरा आपस में शादी करने का पक्का मन बना चुके थे.
इंदिरा के माता-पिता ने उन्हें यूरोप भेज दिया. सोचा शायद दूर रहेंगी तो प्यार का भूत उतर जाएगा लेकिन इससे उनके इरादे पर कोई असर नहीं पड़ा. लंदन में ही उन्होंने जितेंद्र से शादी कर ली. उनके परिवार का कोई भी सदस्य इस शादी में शामिल नहीं हुआ.
पति के निधन के बाद कूच बिहार की शासक बनीं
कुछ ही दिनों बाद बड़े भाई की मृत्यु के बाद जितेंद्र कूचबिहार के महाराजा बन गए. अब इंदिरा एक रियासत की रानी बन गईं. दोनों के पांच बच्चे हुए – जगदीपेंद्र नारायण, इंद्रजितेंद्र नारायण, इला देवी, मेनका देवी और गायत्री देवी. अब इसे नियति का खेल ही कह सकते हैं कि महाराजा जितेंद्र का भी कुछ सालों बाद निधन हो गया. ज्यादा शराब पीना इसकी एक बड़ी वजह थी. अब रानी कूच बिहार की रिजेंट बनी. क्योंकि उनका बड़ा बेटा उस समय छोटा था.
यूरोप में खूब देती थीं पार्टियां
1922 से 1936 तक उन्होंने अपने नाबालिग बेटे जगदीपेंद्र की रीजेंट के रूप में काम किया. उनका शासन सक्षम और आधुनिक दोनों ही दृष्टि से सिद्ध हुआ. उनका ज्यादा समय यूरोप में गुजरा करता था. महारानी वहां खूब पार्टियां देती थीं. खासी लोकप्रिय थीं. हॉलीवुड के कई स्टार रानी के अच्छे दोस्त थे, जिसमें से कई उसकी पार्टियों में शामिल होते रहते थे.
सैंडल्स में  छुड़वाती थीं हीरे मोती
अपनी सैंडल्स में भी हीरे मोती जड़वाने की भी एक अलग ही कहानी है. उन्होंने इटली की जिस कंपनी को सौ जोड़ी सैंडल्स और जूते बनाने का आर्डर दिया था. उसका नाम साल्वातोर फेरोगेमो था. ये कंपनी 20वीं सदी की सबसे फेमस डिजाइनर कंपनी मानी जाती थी. आज भी इस कंपनी के लग्जरी शो-रूम पूरी दुनिया में हैं.
इटली के साल्वातोर फेरागेमो उनके पसंदीदा वेस्टर्न डिजाइनर्स में थे. साल्वातोर ने अपनी आत्मकथा में लिखा, एक बार महारानी ने उनकी कंपनी को जूते बनाने का आर्डर दिया, इसमें एक आर्डर इस तरह की सैंडल बनाने का था जिसमें हीरे और मोती जड़े हों. उन्हें ये हीरे और मोती अपने कलेक्शन के ही चाहिए थे. लिहाजा उन्होंने आर्डर के साथ हीरे और मोती भी भेजे.
अपने जमाने में दुनिया की धनी महिलाओं में एक
वह अपने समय की दुनिया की सबसे धनी महिलाओं में एक थीं. कूच बिहार और उसके आसपास के इलाकों में उनके पास हजारों एकड़ जमीन थी तो कूच बिहार में ही महल, कोलकाता में हवेलियां और दार्जिलिंग में ग्रीष्मकालीन आवास था. हीरे-जवाहरात, मोती और बेशकीमती गहनों का बड़ा संग्रह था. स्विट्जरलैंड और फ्रांस में उनके पास शानदार विला और अपार्टमेंट थे.
वह अपनी विलासिता, फैशन और महंगी कारों के लिए जानी जाती थीं. उनकी कुल संपत्ति का अनुमान आज के हिसाब से करोड़ों से लेकर अरबों डॉलर के बीच लगाया जाता है.
1967 में उनका निधन हुआ. उन्होंने 76 साल की जिंदगी पाई. निधन कैंसर से हुआ. वह इस बीमारी से लंबे समय तक पीड़ित रहीं. इलाज के लिए यूरोप गईं. उनका निधन यूरोप में ही हुआ था.

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