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धनबाद के नए मेयर संजीव सिंह को क्या रांची में गले लगाएगी भाजपा ? , संजीव के तीन दिनों के लिए रांची में जमने से लग रही हैं अटकलें

Newsfast Sabsefast24

धनबाद : बागी बन धनबाद नगर निगम से मेयर पद का चुनाव लड़ने वाले भाजपा के पूर्व विधायक संजीव सिंह के खिलाफ भाजपा अब कोई कार्रवाई नहीं करेगी, बल्कि गले लगाएगी। भाजपा के धनबाद विधायक राज सिन्हा का सिंह मेंशन पहुंच संजीव सिंह को बधाई देना और मुंह मीठा कराना इस बात का संकेत है।

विधायक राज सिन्हा का सिंह मेंशन जाना पार्टी के नरम रुख का संकेत है। संभव है पार्टी के निर्देश पर विधायक ने यह पहल की हो। वैसे विधायक राज सिन्हा ने बात करने पर कहा कि धनबाद का विधायक हूं और धनबाद नगर निगम क्षेत्र का मेयर चुने जाने पर संजीव सिंह को बधाई देने जाना शिष्टाचार है। धनबाद के विकास के लिए मिलकर काम करना है।

नोटिस जारी किया गया था

निगम चुनाव में संजीव सिंह का बागी प्रत्याशी होने पर विधायक पत्नी रागिनी सिंह जो पूरे चुनावी परिदृश्य से गायब दिख रही थी, अब सामने आ गई है। विधायक राज सिन्हा के सिंह मेंशन पहुंचने पर संजीव सिंह और रागिनी सिंह दोनों साथ दिखी। मालूम हो कि संजीव भाजपा समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने पर संजीव सिंह को पार्टी की ओर से नोटिस जारी किया गया था। अब चुनाव जीतने के बाद संजीव सिंह के समर्थक सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में उन्हें भाजपाई, भगवाधारी आदि बता रहे हैं।

राज सिन्हा की ओर से जारी पोस्ट से संकेत

राज सिन्हा की ओर से जारी पोस्ट को देख यह तय समझिए कि भाजपा में पूर्व विधायक संजीव सिंह का स्वागत है। राज सिन्हा ने लिखा है कि धनबाद नगर निगम से महापौर निर्वाचित होने पर छोटे भाई संजीव सिंह के आवास पहुंचकर पुष्प गुच्छ भेंट किया एवं मुंह मीठा कराकर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। आपके नेतृत्व में धनबाद नगर निगम क्षेत्र विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे, यही कामना है। मौके पर झरिया विधायक रागिनी सिंह, उमेश सिंह, शंभू सिंह, उमेश हेलीवाल, अमलेश सिंह तमाल राय, मनोज मालाकार, टुन्नू यादव आदि थे।

कई वरिष्ठ भाजपाइयों का समर्थन था

झारखंड भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं का संजीव सिंह को समर्थन था। पार्टी का समर्थन नहीं मिलने पर संजीव सिंह ने झारखंड भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं से राय विमर्श किया था। इसके बाद ही अंतिम दिन नामांकन किया। संजीव सिंह की जीत के बाद अब भाजपा में इस बात को लेकर भी सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर फैसले लेने में इतनी अपरिपक्वता क्यों। भाजपा के रणनीतिकारों ने धनबाद की जनता की नब्ज को पहचानने में इतनी बचपना क्यों की। संगठन के एक बड़े नेता को लेकर कथित नाराजगी भी चर्चा में है।

भाजपा का मौजूदा नेतृत्व खासा नाराज था

संजीव सिंह के बागी तेवर के बाद कथित रूप से भाजपा की ओर से सिंह मेंशन के खिलाफ जिस नए राजनीतिक प्रयोग की योजना बनी थी, वह संजीव सिंह की जीत के साथ खत्म हो गई। क्या योजना बनी थी, किसने पृष्ठभूमि तैयार की थी, यह सब तो पर्दे के पीछे है। वैसे इस बात में पूरी सच्चाई है कि संजीव सिंह की उम्मीदवारी से झारखंड भाजपा का मौजूदा नेतृत्व खासा नाराज था। झारखंड भाजपा संगठन के एक बड़े नेता के निर्देश पर धनबाद में निगम चुनाव से संबंधित बैठकों में रागिनी सिंह को नहीं बुलाने का निर्देश तक जारी कर दिया था। जिला संगठन की ओर से इसका अनुपालन भी किया गया था।

निर्वाचित मेयर संजीव सिंह तीन दिन रहेंगे रांची में,पोस्ट के बाद अटकलें तेज

रविवार की सुबह-सुबह धनबाद के नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह का फेसबुक पर एक पोस्ट आया है. पोस्ट में कहा गया है सूचनार्थ – प्रिय धनबाद वासियो , आज से 3 दिन तक निजी कार्य के लिए रांची में रहूंगा-आपका संजीव सिंह।

इस पोस्ट के बाद अमूमन जैसे सवाल किए जाते हैं, वैसे सवाल हो रहे हैं. लोग जानना चाह रहे हैं कि इसके पीछे की वजह क्या है? आज से 3 दिन का मतलब हुआ 17 मार्च तक.18 मार्च को डिप्टी मेयर का चुनाव है. मतलब साफ है कि डिप्टी मेयर के लिए जो गणित बैठाना था, वह बैठा लिया गया है. या हो सकता है कि बैठे गणित को रांची में मजबूती दिया जाए.

संजीव सिंह की मुलाकात हो सकती है भाजपा नेताओं से

अभी संजीव सिंह के पैर में चोट है. हो सकता है कि वह इलाज के लिए रांची गए हो, लेकिन इसकी संभावना कम दिख रही है. यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि हो सकता है कि मेयर चुनाव जीतने के बाद अपनी राजनीतिक ताकत का भाजपा में “वजन” नापने के लिए वह तीन दिन तक रांची में रहें। इस दौरान भाजपा के नेताओं से भी उनकी मुलाकात हो सकती है. दरअसल, भाजपा ने निकाय चुनाव में जीते उम्मीदवारों के लिए जो अभिनंदन समारोह आयोजित किया था. उसमें संजीव सिंह नहीं पहुंचे थे. उसके बाद से यह चर्चा चल पड़ी थी कि जदयू के नेता संजीव सिंह पर डोरे डाल रहे हैं. हालांकि इन सब मुद्दों पर संजीव सिंह बिलकुल चुप हैं. वह कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं.

क्यों कहा जा रहा वापसी हो तो संजीव सिंह की तरह

बता दे कि भाजपा सहित अन्य दलों के तमाम तिकड़मों को दरकिनार कर संजीव सिंह भारी मतों से मेयर का चुनाव जीत चुके हैं. कहा जा रहा है कि राजनीति में अगर वापसी हो तो संजीव सिंह जैसा। 8 साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद जब वह बरी होकर जेल से बाहर निकले तो मेयर की कुर्सी उनकी प्रतीक्षा कर रही थी. काफी गुणा -भाग के बाद उन्होंने मेयर का चुनाव लड़ना तय किया और अंत अंत तक चुनाव मैदान में डटे रहे. नतीजा हुआ कि वह चुनाव जीत गए. धनबाद के चारों विधानसभा क्षेत्र में उन्हें अच्छा समर्थन मिला। भाजपा समर्थित प्रत्याशी चार नंबर पर चले गए. झामुमो समर्थित प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे, कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी तीसरे नंबर पर थे. यह चुनाव परिणाम कई धनबाद के मजबूत “स्वयंभू” नेताओं को परेशान कर रहा है. डिप्टी मेयर के चुनाव में भी तिकड़म किया गया, लेकिन अब केवल चुनाव की औपचारिकता शेष है, ऐसा सूत्र बताते हैं.

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