धनबाद : 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना बहुत जरूरी है. भारत सरकार इस लक्ष्य की ओर मिशन मोड में तेजी से काम कर रही है. देश के प्रमुख शोध संस्थानों में से एक CSIR-CIMFR (सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च, धनबाद) भी इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. बातचीत के दौरान, उन्होंने क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भारत सरकार और CSIR द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तृत जानकारी दी. प्रो. मिश्रा ने बताया कि भारत सरकार ने मिशन मोड में “नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन” शुरू किया है, जिसके तहत पूरे देश में क्रिटिकल और रेयर अर्थ मिनरल्स की पहचान, मैपिंग और रिसर्च किया जा रहा है. CSIR ने भी इस दिशा में मिशन मोड में कई प्रोजेक्ट शुरू किए हैं.
सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी दी है. ये केंद्र देश में उपलब्ध क्रिटिकल मिनरल्स का व्यापक रिसर्च और मैपिंग कर रहे हैं. चार प्रमुख CSIR अनुसंधान केंद्र—CSIR-CIMFR, CSIR-IMT, CSIR-NML, और CSIR-CECRI—संयुक्त रूप से इस परियोजना पर काम कर रहे हैं.
पावर प्लांट के वेस्ट के सैंपल किए जा रहे जमा
उन्होंने आगे बताया कि माइंस, रिफाइनरियों और बेनिफिशिएशन प्लांट से निकलने वाले वेस्ट की भी मैपिंग की जा रही है. इसी क्रम में NTPC के साथ एक समझौता किया गया है, जिसके तहत NTPC के सभी पावर प्लांट से वेस्ट के सैंपल इकट्ठा किए जा रहे हैं. अलग-अलग कोयला खदानों और कोयला सीम में क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता भिन्न-भिन्न होती है. माइका माइंस के वेस्ट में भी इन मिनरल्स की अलग-अलग संभावनाएं पाई गई हैं. झारखंड में क्रिटिकल मिनरल्स की अपार संभावना है और भविष्य में यह राज्य इस क्षेत्र में देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान देगा.
प्रो. मिश्रा ने बताया कि सैंपल कलेक्शन के बाद, वेस्ट में उपलब्ध क्रिटिकल मिनरल्स की मात्रा पता लगाने के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है. इसे प्राइमरी सोर्स के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसके साथ ही सेकेंडरी सोर्स पर भी काम चल रहा है. मोबाइल की खराब बैटरियां, इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट और खराब मैग्नेट से रेयर अर्थ मिनरल्स की रिकवरी को लेकर भी रिसर्च जारी है.
विकसित भारत के लक्ष्य में झारखंड निभाएगा अहम भूमिका
निदेशक ने कहा कि आने वाले सालों में, झारखंड 2047 तक आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा. रक्षा, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और हेल्थकेयर सेक्टर सहित क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत वाले उद्योगों में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं.
उन्होंने साफ किया कि विकसित भारत के विजन के तहत, भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना जरूरी है ताकि उसे किसी दूसरे देश पर निर्भर न रहना पड़े. भारत सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है.



