धनबाद : झारखंड के धनबाद में आठ लेन सड़क किनारे बिना बाउंड्री वाल का उत्क्रमित मध्य विद्यालय बड़की बौआ बच्चों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. इस स्कूल में आज तक बाउंड्री वाल का निर्माण नहीं हो सका है. बाउंड्री वाल नहीं होने की वजह से स्कूल के नौनिहालों की जान हर समय खतरे में बनी रहती है. 8 लेन सड़क पर वाहनों की रफ्तार बेहद तेज रहती है, आए दिन ओवरस्पीडिंग होती है, वहीं कुछ वाहन चालक खतरनाक स्टंट करते नजर आते हैं. ऐसे में सड़क से महज कुछ कदम दूर स्थित यह स्कूल किसी बड़े हादसे को न्योता देता दिखाई दे रहा है.
पिछले दो वर्षों से इस स्कूल के बच्चे इसी डर के माहौल में पढ़ाई कर रहे हैं. बच्चों का कहना है कि उन्हें हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए. आउटडोर खेल तो दूर, वे खुले मैदान में निकलने से भी घबराते हैं. मासूम बच्चों के चेहरे पर खेलने की खुशी नहीं, बल्कि हादसे का डर साफ नजर आता है.
विद्यालय के शिक्षकों रोना है कि कि 8 लेन सड़क निर्माण के दौरान स्कूल के तीन कमरे और बाउंड्री वाल को तोड़ दिया गया था. उस समय निर्माण कंपनी द्वारा 48 लाख रुपये देने का आश्वासन दिया गया था, ताकि बाउंड्री वाल और क्षतिग्रस्त कमरों का पुनर्निर्माण किया जा सके. लेकिन दुखद बात यह है कि दो साल बीत जाने के बावजूद न तो बाउंड्री वाल बनी और न ही कक्षाओं का निर्माण हो सका. उत्क्रमित मध्य विद्यालय बड़की बौआ में बाउंड्री वाल नहीं रहने से यहां बच्चों के पठन-पाठन पर असर पड़ रहा है।
स्कूल में कमरों की कमी के कारण कक्षा एक से तीन तक के बच्चों को एक ही कमरे में पढ़ाया जा रहा है. इससे न सिर्फ पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है. 8 लेन सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाज और डर बच्चों के मनोबल को कमजोर कर रहा है.
स्कूल से सटा है 8 लेन
बाउंड्री वाल नहीं होने का फायदा असामाजिक तत्व भी उठा रहे हैं. स्कूल बंद होने के बाद परिसर में शराबियों का जमावड़ा लग जाता है. शराब की खाली बोतलें और अन्य आपत्तिजनक सामान स्कूल परिसर में पड़े रहते हैं. कई बार स्कूल समय के दौरान भी बाहरी लोग परिसर में घुस आते हैं, जिससे शिक्षक और छात्र दोनों असहज महसूस करते हैं. यही नहीं मवेशी भी स्कूल परिसर में प्रवेश कर जाते हैं, जो शिक्षक और बच्चों के लिए परेशानी का सबब है. शिक्षक और बच्चे पठन पाठन छोड़ मवेशियों को भगाने में जुटे रहते हैं.
इस मामले को लेकर डीसी आदित्य रंजन ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए दूसरी जगह स्कूल के लिए जमीन चयनित की गई है. इसके लिए जल्द ही भवन का निर्माण कर स्कूल को शिफ्ट कर दिया जाएगा.
वहीं जिला शिक्षा अधीक्षक आयुष कुमार ने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान ही 47 लाख की राशि का भुगतान सड़क निर्माण कंपनी के द्वारा किया गया था. बाउंड्री और कमरों के निर्माण के लिए भवन प्रमंडल को फाइल भेजी गई है. निकाय चुनाव के बाद सम्भवतः मार्च में स्कूल में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा. तब तक स्कूल प्रबंधन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी है.
यह सवाल अब और गंभीर हो गया है कि क्या विकास की चमक के बीच बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा सकता है? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? आखिर कब तक उत्क्रमित मध्य विद्यालय बड़की बौआ के नौनिहाल अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ने को विवश रहेंगे?



