धनबाद : धनबाद राज्य का पहला ऐसा जिला बन गया, जिसने मैट्रिक-इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम लाने को प्रोत्साहित करने के लिए प्री-बोर्ड के टापर्स को सम्मानित किया।
झारखंड शिक्षा परियोजना कार्यालय धनबाद की ओर से शनिवार को न्यू टाउन हाल में इस तरह का अनूठा आयोजन किया गया।
इसमें 17 से 24 दिसंबर तक संपन्न हुए मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट के प्री-बोर्ड में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थन पाने वाले 691 विद्यार्थियों को ब्लेजर, स्कूल बैग, बाटल एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। इसमें 220 प्रथम, 225 द्वितीय एवं 230 तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले छात्र-छात्राएं शामिल थे।
सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि कार्यक्रम में छात्रों को मार्गदर्शन देने के लिए चार आइएएस, एक आइपीएस और दो झारखंड प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारी एक साथ मंच पर उपस्थित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत उपायुक्त आदित्य रंजन, एसएसपी प्रभात कुमार, डीडीसी सन्नी राज, नगर आयुक्त आशीष गंगवार, एसडीएम लोकेश बारंगे, डीईओ अभिषेक झा एवं डीएसई आयुष कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम की रूपरेखा डीईओ अभिषेक झा ने रखी। डीईओ अभिषेक झा ने कहा संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा विश्व की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इस परीक्षा को उत्तीर्ण कर पदाधिकारी आज हमारे जिले में महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं। ऐसा अवसर बहुत कम मिलता है, जब हमें उनके जीवन अनुभवों से सीखने का सौभाग्य मिले।
उपायुक्त आदित्य रंजन ने मंच से घोषणा की फाइनल बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम लाने वाले टाप-30 छात्रों को जिला प्रशासन की ओर से झारखंड दर्शन एवं भारत दर्शन कराया जाएगा। 15 जनवरी से दूसरा प्री-बोर्ड होगा। इसके टापर्स भी इसी तरह सम्मानित होंगे। इस अवसर पर प्री-बोर्ड का प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षकों ने भी छात्रों को आगामी परीक्षा के लिए टिप्स दिया। कुछ छात्रों ने भी अपने विचार रखे।
प्रथम स्थान पाने वाले छात्रों को एक ब्लेजर एक, बैग और एक बाटल, द्वितीय स्थान को एक बैग व एक बाटल और तृतीय स्थान के एक बैग एवं प्रमाणपत्र उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। यहां बता दें कि 143 हाई स्कूल और 38 प्लस टू स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षा हुई। मैट्रिक में 24 हजार और इंटर में 15 हजार छात्र शामिल हुए। मंच संचालन घनश्याम दूबे एवं एमिली बासु ने किया।
अन्य जिलों ने भी हमारे प्रश्नपत्र का किया अनुसरण : डीसी
डीसी आदित्य रंजन ने कहा :
जिले में प्री-बोर्ड परीक्षा पदाधिकारियों की निगरानी में संपन्न हुई। विशेष रूप से उन सभी शिक्षकों और अधिकारियों का आभार व्यक्त करना चाहेंगे जिन्होंने अपने नियमित दायित्वों के अतिरिक्त दिन-रात मेहनत करते हुए कम समय में प्रश्नपत्र तैयार किए।
गर्व की बात है कि हमारे द्वारा तैयार प्रश्नपत्र न केवल धनबाद जिले में, बल्कि अन्य जिलों में भी उपयोग किए गए। यह पूरे धनबाद शिक्षा विभाग और हमारे शिक्षकों के लिए सम्मान की बात है। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए पैनल में शामिल सभी शिक्षकों के लिए जोरदार तालियां हों।
इस बार प्री-बोर्ड परीक्षा और परिणाम दोनों ही रिकार्ड समय में पूरे किए गए। आज यहां एक छोटे से कार्यक्रम के माध्यम से कुछ विद्यार्थियों को सम्मान स्वरूप उपहार भी प्रदान कर रहे हैं। विद्यार्थियों अब आपका काम है कि विद्यालय जाकर और अधिक मेहनत करें। जिन स्कूलों का प्रदर्शन थोड़ा कम रहा है, वे आज आप सबको यहां देखकर निश्चित ही प्रेरित होंगे और बेहतर प्रयास करेंगे।
हैंड राइटिंग बढ़िया हो, जिससे एग्जामिनर का सर दर्द न हो : एसएसपी
एसएसपी प्रभात कुमार ने कहा :
पुलिस अधिकारी का कार्यक्षेत्र और दिनचर्या सामान्य परिस्थितियों में इस प्रकार के कार्यक्रमों में शामिल नहीं होता, लेकिन आप सभी के कारण इस अवसर पर छात्रों से संवाद करने का मौका मिला। सभी अधिकारियों ने जो बातें कहीं, यदि आप उन पर सही से अमल करेंगे तो न सिर्फ आपके परिणाम बेहतर होंगे, बल्कि आपका जीवन भी बदल जाएगा।
पिछले वर्ष धनबाद की रैंकिंग 13 थी, और इस बार इसे सुधारने की जिम्मेदारी छात्रों पर है। इस 13 में से एक डिजिट जरूर हटाना है। इस पर छात्रों ने उत्साहपूर्वक जवाब दिया – तीन हटाएंगे। एसएसपी ने कहा कि मोबाइल ने जीवन को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसका सबसे बड़ा दुरुपयोग यह है कि यह छात्रों के लिए डिस्ट्रैक्शन का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है। जहां जरूरत हो वहीं मोबाइल का उपयोग करें।
जितने भी लोग इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय हैं, वे परीक्षा तक कम से कम एक माह उसे डिलीट कर दें। अनुशासन, नियंत्रण और एकाग्रता ही सफलता की कुंजी है। छात्रों की हैंड राइटिंग परीक्षा में ऐसी हो कि एग्जामिनर का सर दर्द न हो। इससे अधिक अंक मिलेगा। परीक्षा में सौ प्रतिशत प्रश्न हल करें, कुछ भी मत छोड़ें।
कभी भी परीक्षा में नए पेन प्रयोग न करें : डीडीसी :
उप विकास आयुक्त सन्नी राज ने कहा : हर बच्चे में वह क्षमता है कि परीक्षा क्वालीफाई कर सके और अच्छे अंक प्राप्त कर सके। आपके भीतर जो छोटी-सी आग थी, हमारी कोशिश रही कि उसे हवा देकर ज्वालामुखी बनाया जाए। हम चाहते हैं कि यह ज्वालामुखी अंतिम परीक्षा तक जलता रहे। प्री-बोर्ड के परिणाम से किसी भी बच्चे को संतुष्ट नहीं होना चाहिए। यह परिणाम केवल आपके लेवल आफ प्रिपरेशन को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों का कर्तव्य केवल टापर बच्चों तक सीमित नहीं है, उन अंतिम पंक्ति के विद्यार्थियों तक है जो उम्मीद लेकर स्कूल आते हैं। उनकी उम्मीद को टूटने नहीं देना है। समय प्रबंधन और अंतिम के दस मिनट में पेपर रिवीजन बहुत जरूरी है। पेपर शुरू होने के पांच मिनट तक गहरी सांस लें, ध्यान से प्रश्न पढ़ें। कभी भी परीक्षा में नए पेन प्रयोग न करें। दो तीन पहले उससे लिख लें। परीक्षा सेंटर पर समय पर पहुंचे। जितना सुंदर प्रस्तुत करेंगे, उतना अधिक अंक मिलेगा।
मोबाइल का प्रयोग सीमित रूप से करें : नगर आयुक्त
नगर आयुक्त आशीष गंगवार ने कहा :
मोबाइल फोन बहुत सारी चीजें कर सकता है। यह बना भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है। इसलिए मोबाइल का प्रयोग हमेशा सोच-समझकर और सीमित रूप से करें।
वे स्वयं नवोदय विद्यालय से पढ़े हुए हैं और बोर्ड परीक्षाओं में समय प्रबंधन को सबसे महत्वपूर्ण बताया। परीक्षा के दौरान छोटी-मोटी गलतियां हो जाना स्वाभाविक है, प्री-बोर्ड का महत्व इसी में है कि वहां की गई गलतियां हमारे दिमाग में बैठ जाती हैं और फाइनल बोर्ड परीक्षा में दोबारा नहीं दोहराई जातीं।
कुछ बच्चे प्री-बोर्ड को गंभीरता से नहीं लेते, जबकि इसे उतनी ही गंभीरता से लेना चाहिए जितना बोर्ड परीक्षा को। जो भी प्री-बोर्ड में टापर नहीं बन पाए हैं, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। असली परीक्षा अभी आपके सामने है।
लर्निंग के साधन के रूप में करें इलेक्ट्रानिक टूल्स का प्रयोग : एसडीएम
एसडीएम लोकेश बारंगे ने कहा :
जब हम लोग 10वीं और 12वीं में थे, तब विद्यालय की टेक्स्टबुक्स को ही पूरी तरह पढ़ लेना बहुत बड़ी बात होती थी। रेफरेंस बुक्स के बारे में तो हमें जानकारी भी नहीं होती थी कि ऐसी कोई पुस्तकें बाजार में उपलब्ध होती हैं। आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है।
आज छात्रों के पास जानकारी की अपार पहुंच है। रेफरेंस बुक्स हों या आनलाइन स्टडी मैटेरियल, इन सब तक पहुंच इलेक्ट्रानिक तकनीक के माध्यम से बेहद आसान हो गई है। अब मोबाइल फोन से कुछ भी खोजा जा सकता है। आज एआइ आ गया है, चैट जीपीटी जैसे साधन आ गए हैं। अब सवाल यह है कि हम इन टूल्स का इस्तेमाल करके कितनी स्मार्ट तरीके से सीख सकते हैं। इलेक्ट्रानिक टूल्स को लर्निंग के साधन के रूप में अपनाएं। इनका उपयोग समझदारी से करें।मोबाइल फोन बहुत सारी चीजें कर सकता है। यह बना भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है। इसलिए मोबाइल का प्रयोग हमेशा सोच-समझकर और सीमित रूप से करें।
वे स्वयं नवोदय विद्यालय से पढ़े हुए हैं और बोर्ड परीक्षाओं में समय प्रबंधन को सबसे महत्वपूर्ण बताया। परीक्षा के दौरान छोटी-मोटी गलतियां हो जाना स्वाभाविक है, प्री-बोर्ड का महत्व इसी में है कि वहां की गई गलतियां हमारे दिमाग में बैठ जाती हैं और फाइनल बोर्ड परीक्षा में दोबारा नहीं दोहराई जातीं।
कुछ बच्चे प्री-बोर्ड को गंभीरता से नहीं लेते, जबकि इसे उतनी ही गंभीरता से लेना चाहिए जितना बोर्ड परीक्षा को। जो भी प्री-बोर्ड में टापर नहीं बन पाए हैं, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। असली परीक्षा अभी आपके सामने है.



