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मधुबनी (बिहार) के कायस्थ प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने लिखी थी भारत का संविधान, एक रुपया भी नहीं लिया, हर पेज पर लिखा अपना नाम, संविधान दिवस पर जानें रोचक कहानी

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मधुबनी (बिहार) : दुनिया का सबसे बड़ा संविधान भारत का है. भारतीय संविधान के रचयिता डॉ. भीमराव अंबेडकर थे, लेकिन क्या आपको पता है कि संविधान की मूल प्रति किसने अपने हाथों से लिखी.

बिहार के मधुबनी जिले के प्रेम बिहारी नारायण रायजादा कायस्थ थे और वे भारतीय संविधान के मूल हस्तलेखक थे। वे सक्सेना उपनाम से भी जाने जाते हैं और उन्हें उनके सुंदर हस्तलेखन के लिए जाना जाता है। ये वो शख्स थे, जिन्होंने संविधान की ये मूल प्रति अपने हाथों से लिखी थी. ये मूल प्रति अंग्रेजी में लिखी गई थी. संविधान की मूल प्रति अंग्रेजी भाषा में है, जिसका हिन्दी में भी अनुवाद किया गया.पेन की 432 निब घिसने के बाद छह महीने में उन्होंने ये प्रति तैयार की. निब को लकड़ी के होल्डर में लगाकर और उसे स्याही में डुबोकर लिखने का कार्य किया गया

*संविधान लिखने की कोई फीस नहीं ली*

भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने प्रेम बिहारी से संविधान इतालवी भाषा में लिखने का अनुरोध किया था. प्रेम बिहारी ने संविधान लिखने के लिए कोई भी शुल्क नहीं लिया. लेकिन संविधान के हर पेज पर अपना नाम लिखने और आखिरी पेज पर अपने दादाजी रामप्रसाद सक्सेना का नाम लिखने की शर्त जरूर रखी.प्रेम बिहारी ने जिस कक्ष में संविधान को बैठकर लिखा, वहीं संविधान क्लब का निर्माण किया गया.कॉन्स्टीट्यूशन हॉल में प्रेम बिहारी को ये संविधान लिखने में 6 महीने का वक्त लिखा.

संविधान खास कागज में लिखी गई, 432 निब घिस गईं

संविधान की ये मूल प्रति 45.7 गुना 58.4 सेमी के खास पार्चमेंट कागज पर लिखी गई थी. ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर से यह न चिपकने वाला खास कागज संविधान लेखन के लिए मंगाया गया. संविधान की मूल प्रति लेदर की काली जिल्द में है. अंग्रेजी की प्रति में 233 पन्ने हैं.इस पर सोने की कारीगरी की गई. संविधान की हिन्दी की प्रति में 264 पन्ने हैं, जिसका वजन 13 किलो है. संविधान की हिन्दी प्रति पुणे के रिसर्च सेंटर में बना है. हिन्दी की ये संविधान प्रति कैलिग्राफर वसंत कृष्ण वैद्य ने लिखी थी.

*संविधान खास कागज में लिखी गई, 432 निब घिस गईं*

संविधान की ये मूल प्रति 45.7 गुना 58.4 सेमी के खास पार्चमेंट कागज पर लिखी गई थी. ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर से यह न चिपकने वाला खास कागज संविधान लेखन के लिए मंगाया गया. संविधान की मूल प्रति लेदर की काली जिल्द में है. अंग्रेजी की प्रति में 233 पन्ने हैं.इस पर सोने की कारीगरी की गई. संविधान की हिन्दी की प्रति में 264 पन्ने हैं, जिसका वजन 13 किलो है. संविधान की हिन्दी प्रति पुणे के रिसर्च सेंटर में बना है. हिन्दी की ये संविधान प्रति कैलिग्राफर वसंत कृष्ण वैद्य ने लिखी थी.

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